मध्यप्रदेश में नहीं रूक रही रिश्वतखोरी जानिए क्या है पूरा मामला

सरकार की तमाम सख्तियों और छापामार टीमों की लगातार कार्रवाईयों के बावजूद मध्य प्रदेश में रिश्वत खोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। हर रोज कोई अफसर या कर्मचारी रिश्वत लेते धरा रहा है, बावजूद इसके इन घूसखोरों में कोई डर नहीं है। ऐसा ही एक ताजा मामला सागर जिले के बंडा से सामने आया है। यहां खेत में लगी लकड़ी के परिवहन की अनुमति के नाम पर रिश्वत मांगना वन अधिकारी और कर्मचारी को मुसीबत बन गया है। लोकायुक्त टीम ने बंडा वन परिक्षेत्र कार्यालय में पदस्थ रेंजर और क्लर्क (बाबू) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

मकरोनिया के ज्योति नगर निवासी विजय सिंह राजपूत का खेत बंडा क्षेत्र में है। उनके खेत में बड़ी संख्या में सागौन सहित अन्य प्रजाति के पेड़ लगे हुए हैं। खेत से पेड़ों की कटाई और लकड़ी के परिवहन के लिए विजय सिंह ने स्थानीय वन विभाग से अनुमति मांगी थी। किसान की ओर से आरोप लगाया गया कि, कार्यालय में पदस्थ क्लर्क जयप्रकाश तिवारी द्वारा लगातार उनसे पैसों की मांग की जा रही थी।

किसान पहले ही 40 हजार रुपए दे चुका था, लेकिन इसके बाद भी रेंजर विकास सेठ द्वारा अतिरिक्त रकम की मांग की जाती रही। कुल मिलाकर 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। लगातार हो रही मांग से परेशान किसान ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की। तय योजना के तहत किसान को शेष 50 हजार रुपए लेकर कार्यालय भेजा गया।

जैसे ही रेंजर ने रिश्वत की राशि अपने हाथ में ली, पहले से आसपास घात लगाए बैठी लोकायुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर रेंजर विकास सेठ और क्लर्क जय प्रकाश तिवारी को रंगे हाथ दबोच लिया। फिलहाल, दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से वन विभाग कार्यालय में हड़कंप मच गया है।

संवाददाता दीपक मालवीय