गोपाल भार्गव बोले आधा-अधूरा वक्तव्य किया वायरल, वर्ग संघर्ष नहीं, विकास की बात की
पद्माकर सभागार में हुए श्री प्रेम प्रसारणी सनाढ्य सभा के प्रांतीय सर्व ब्राह्मण सम्मेलन में पूर्व मंत्री और रहली विधायक गोपाल भार्गव का जाति के व्यक्ति की तरफ ही जाने का बयान सामने आया है। जिसका वीडियो वायरल होने के बाद तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि आप पूरा वक्तव्य सुनिए। मेरा आधा-अधूरा वक्तव्य वायरल कर अर्थ का अनर्थ किया जा रहा है। मैंने सम्मेलन में अपनी बात शुरू करने के पहले ही सब कुछ स्पष्ट कर दिया था।
यह कहा था पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने...
राजनीति में माओवादी, मार्क्सवादी पार्टियां चलती रही हैं, जिनका विचार था कि विकास, सत्ता, नौकरी और आज़ादी बंदूक
की नली से निकलती है। आज के इस वक्त में हम यह नहीं कहते हैं कि आजादी बंदूक की
नली से निकलती है, क्योंकि हम आजाद हैं।
लेकिन नौकरी, रोजगार, संपन्नता वह निकलता है तो आपके वोट से, इसलिए सारे हमारे बंधुओं के लिए एकजुट होना जरूरी है। मैंने अनेकों समाजों के
बारे में देखा है कि खूब पार्टियों में रहेंगे। बड़े पदों पर
सोंगे। लेकिन जब उनकी जाति का आदमी खड़ा होगा। समाज का आदमी खड़ा होगा तो वह
कितना ही निष्ठावान क्यों न हो दूसरी पार्टी का, लेकिन वह अपनी पार्टी के व्यक्ति की तरफ ही जाएगा। भले ही वह खुलकर प्रचार ना
करे, लेकिन अंदर-अंदर प्रचार करके उसको
जिताने का काम करेगा। जाति के सामने फिर पार्टी कुछ नहीं रह जाती, जो स्थिति भारत में आजादी के बाद ब्राह्मणों की थी, हमारी जो हैसियत थी 1947 में, आजादी के बाद और आजादी
के पहले, वह अब नहीं रही।
यह बात लोग स्वीकार करते हैं। इस बात से यह नहीं लगना चाहिए कि हम कोई वर्ग
संघर्ष की बात कर रहे हैं, हम अपने जीवन को ऊंचा उठाने के प्रति संघर्ष की बात कर रहे हैं। हमें अच्छे से
रहने का अधिकार मिले। हमें दो समय के भोजन की व्यवस्था हो जाए। हमारे बच्चे ठीक से
पढ़ने जाएं। बीमार हों तो ठीक से इलाज हो जाए। हमें भी रहने के लिए अच्छे मकान
मिले और जो भी जीवन की तमाम आवश्यकताएं होती हैं वह मिलें। इस बात की चर्चा अपनी समाज
में जाकर नहीं करेंगे तो और कहां करेंगे। क्योंकि हमारे पास तो अपनी बात रखने के
लिए और कोई दूसरा फोरम है ही नहीं। इसलिए अपने वरिष्ठों, कनिष्ठों, युवाओं के बीच अपने
सुख-दुख की चर्चा कर लेते हैं। इसीलिए ऐसे सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
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