फर्जी रजिस्ट्री मामला : शपथ पत्र नकली नोटरी अधिकारी ने दिया जांच के लिए आवेदन, नामांतरण निरस्त करने के सवाल पर एसडीएम बोले- मैं क्या कर सकता हूं...
दमोह जिले की पथरिया तहसील के ग्राम पुरैना पिपरिया चंपत निवासी देवी सिंह राजपूत की मृत्यु एक सड़क दुर्घटना में हो चुकी थी। लेकिन 2021 में देवी सिंह राजपूत को जिंदा बताकर कोटातला निवासी शिवम राय को मृतक के नाम दर्ज 1.35 हे. जमीन में से 0.60 हे. जमीन फर्जी तरीके से बेच दी गई। फर्जी रजिस्ट्री के इस पूरे मामले का खुलासा 2021 में तब हुआ जब मृतक के परिजनों ने अनुज पांडे निवासी पुरैना को चार लाख पचास हजार का बयाना लेकर फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री मृतक देवी सिंह को जिंदा बताकर शिवम राय को कर दी गई। वर्तमान में फर्जी रजिस्ट्री एवं अनुज पांडे के साथ हुई धोखाधड़ी की जांच एसडीओपी पथरिया के द्वारा की जा रही है। फर्जी रजिस्ट्री के बाद 2012 में मर चुके देवी सिंह ने न सिर्फ तहसील कार्यालय में उपस्थित होकर नामांतरण प्रक्रिया में हिस्सा लिया बल्कि नोटरी द्वारा सत्यापित एक शपथ पत्र भी तहसील न्यायालय में पेश किया था। जहां फर्जी देवी सिंह को वास्तविक देवी सिंह मानकर रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री करवा दी। वहीं तहसीलदार पटवारी ने मिलकर जमीन का फर्जी नामांतरण भी करवा दिया। मामले में नया मोड़ तब आया जब मीडिया में खबरें छपी और नोटरी अधिकारी पीपी चौबे ने पथरिया थाने पहुंच कर मृतक का शपथ पत्र न बनाने का उल्लेख करते हुए जांच का आवेदन दिया। एसडीएम ने नामांतरण निरस्त करने के सवाल पर बोले- मैं क्या कर सकता हूं।
शपथ पत्र झूठा तो नामांतरण सही कैसे?
फर्जी रजिस्ट्री के बाद नामांतरण प्रक्रिया में जहां फर्जी इस्तहार निकलवाए गए, फर्जी मुनादी करवाई गई। वहीं तत्कालीन पटवारी राकेश विश्वकमां ने मृतक देवी सिंह को जिंदा बताकर नामांतरण किए जाने का प्रतिवेदन तहसील न्यायालय में पेश कर दिया। नामांतरण के लिए तहसील न्यायालय में दिनांक 4/7/2022 को 2012 में मर चुके देवी सिंह राजपूत का शपथ पत्र पेश किया गया। तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया शपथ पत्र नोटरी अधिकारी के रूप में पी पी चौबे के हस्ताक्षर एवं नोटरी सत्यापन प्रक्रिया की सील लगी हुई थी। नोटरी अधिकारी पी पी चौबे द्वारा पथरिया थाने में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है जिसमें उन्होंने लेख किया है कि मृतक देवी सिंह का शपथ पत्र, जो नामांतरण में लगाया गया है, उनके द्वारा नहीं बनाया गया है। शपथ पत्र की जांच कर फर्जी शपथ पत्र बनाने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।
फर्जी शपथ पत्र फिर भी राजस्व अधिकारी दिखा रहे लाचारता
नामांतरण में लगे फर्जी शपथ पत्र को नोटरी अधिकारी द्वारा
फर्जी बताए जाने के बावजूद तहसील स्तरीय राजस्व अमला नामांतरण प्रक्रिया में बरती
गई गंभीर लापरवाही को सुधारने का नाम नहीं ले रहा है। फर्जी रजिस्ट्री,
फर्जी पटवारी प्रतिवेदन और फर्जी शपथ पत्र होने के बाद भी
राजस्व अधिकारी जमीन के फर्जी नामांतरण को निरस्त करने तैयार नहीं है। ये जानते
हुए कि 2012 में मृत देवी सिंह राजपूत 4/7/2022 को तहसील न्यायालय में उपस्थित
होकर शपथ पत्र नहीं दे सकता। 9 साल पहले मर चुका व्यक्ति तहसीलदार के समक्ष
उपस्थित नहीं हो सकता, उसके बाद भी एसडीएम निकेत चौरसिया फर्जी नामांतरण के पूरे मामले को पुलिस का
बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे है। जबकि मृत व्यक्ति द्वारा न तो
रजिस्ट्री की जा सकती है, न उसका शपथ पत्र बनाया जा सकता है, न ही मृत व्यक्ति तहसीलदार के समझ उपस्थित हो सकता है। ये
सब जानते है, साक्ष्य
बतौर दस्तावेज होने के बाद भी राजस्व अमला फर्जी नामांतरण निरस्त नहीं करना चाहता
है।

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