बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ़ आन्दोलन से ज्यादा विपक्ष का शादी समारोह में जाना है अधिक महत्त्वपूर्ण
सागर जिले की बीना
सीट से गौसेवक को गाली देने के लिए चर्चित हुई विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका में सुनवाई के
दौरान विधायक निर्मला सप्रे ने कहा मैं अब भी कांग्रेस में हूं और इसी कथन ने बीना की राजनीति को और अधिक
गर्म कर दिया, 2023 में बीना विधानसभा
से निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था, 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ भाजपा के
कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, इसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने के दावे भी किए गए
थे लगातार बीना विधायक भाजपा के कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराती रही वही
सार्वजनिक मंच से सागर सांसद ने उनके भाजपा में होने की पुष्टि की एवं स्वयं बीना
विधायक ने भी सार्वजनिक मंच से भाजपा में शामिल होने की बात कहते हुए दलबदल स्वीकारा
है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं प्रदीप राय की तरफ से दी गई दलील पर कोर्ट ने कहा सोशल
मीडिया पर किए गए पोस्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति की स्थिति तय नहीं हो सकती है
यह कहते हुए प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है जिससे यह साबित हो सके कि
निर्मला सप्रे ने वास्तव में दल-बदल किया है...
जनता के मध्य सवाल तो यह भी बनता है कि बीना विधायक यदि कांग्रेस में है तो उनके साथ सागर जिला के भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी एवं पूर्व जिला अध्यक्ष गौरव सिरोठिया कार्यक्रमों में एक साथ शिरकत क्यों करते हैं? वहीं बीना विधायक यदि कांग्रेस में है तो भाजपा स्थापना दिवस पर सोशल मीडिया पर बधाई क्यों दे रही है वैसे बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस
के टिकिट पर चुनाव जीतीं निर्मला सप्रे की पार्टीवार स्थिति राज्यसभा चुनाव में
साफ हो सकती है इन चुनावों में गुप्त मतदान नहीं होता और विधायक को अपना वोट
पार्टी प्रतिनिधि को दिखाना होता है नियम का उल्लंघन करने पर वोट रद्द हो सकता है
वैसे निर्मला सप्रे भाजपा उम्मीदवार को वोट देती हैं तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर
कोई असर नहीं पड़ेगा।
अब बात करें विपक्ष की तो उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश की राजनीति में दांव आजमाने आए गुड्डू राजा उर्फ चंद्रभूषण सिंह बुंदेला एक बड़े काफिले के साथ कांग्रेस में शामिल तो हुए थे जिसके बाद कांग्रेस की टिकट से मध्य प्रदेश की सागर लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़े किन्तु उन्हें भाजपा प्रत्याशी लता वानखेड़े से 4,71,222 मतों से करारी हार का सामना करना पड़ा था, अब सवाल यह बनता है कि कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ने वाले गुड्डू राजा उर्फ चंद्रभूषण सिंह बुंदेला ने सागर क्षेत्र के स्थानीय मुद्दे कितने दफ़ा उठाए है, बीना विधानसभा में दल-बदल से लेकर के बीना रिफाइनरी में क्षेत्रीय युवाओं के रोजगार मिलने तक, किसानों की समस्या से लेकर गौचर भूमि में हुए कब्जे और बीना नदी परियोजना से वंचित गाँवों को जुड़वाने जैसे गंभीर विषय पर गुड्डू राजा की सक्रियता या धरातल पर कोई आंदोलन देखने को नहीं मिला उनकी सोशल मीडिया पर जमीनी विषयों पर आन्दोलन से अधिक शादी विवाह में शामिल होने की तस्वीरें ज्यादा नज़र आती है, वैसे बात करें बीना विधानसभा के उपचुनाव की तो उपचुनाव में भाजपा बीना में होने वाली भागवत कथा के भरोसे मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करने वाली है वहीं कांग्रेस पार्टी अपने दल के प्रत्याशी पर दांव खेलने से ज्यादा भरोसा भाजपा से पूर्व विधायक महेश राय के दल-बदल होने पर कर रही है...

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