कच्ची शराब के खिलाफ सख्ती, दोबारा गलती पर समाज से बहिष्कार की चेतावनी


दमोह जिले के हटा ब्लॉक स्थित मडियादो गांव में आदिवासी समाज ने शराबबंदी को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। समाज ने ऐलान किया है कि यदि कोई भी सदस्य शराब पीते हुए पाया जाता है, तो उस पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं दोबारा गलती करने पर उसे समाज से बहिष्कृत भी किया जा सकता है।

रविवार दोपहर आदिवासी समाज के लोग बंजार टोला पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों को स्पष्ट चेतावनी दी कि उनके क्षेत्र में अब कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री पूरी तरह बंद की जाए।

दरअसल, बंजार टोला में रहने वाले कुछ लोग कच्ची शराब बनाने और बेचने का काम करते हैं, जो आसपास की आदिवासी बस्तियों में सप्लाई की जाती है। इसके चलते गांव में पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं और रिपोर्टों के मुताबिक छोटे बच्चे भी शराब की लत का शिकार हो रहे हैं।

आदिवासी समाज ने इस मामले की जानकारी दो दिन पहले पुलिस को भी दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ शराब जब्त की, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी कथित निष्क्रियता से नाराज होकर रविवार को समाज के लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, बंजार टोला पहुंचे और बैठक कर सख्त निर्णय लिया।

समाज के मुखिया बिरजू आदिवासी ने कहा कि कच्ची शराब के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं और महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसी वजह से समाज ने यह कठोर कदम उठाया है।

वहीं देवेंद्र आदिवासी ने बताया कि बंजार टोला से अवैध शराब आदिवासी क्षेत्र में बेची जा रही थी, इसलिए पंचायत ने निर्णय लिया है कि अब उनके इलाके में शराब की बिक्री बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संवाददाता : किशोर कुशवाहा