बीना विधानसभा में किसकी शय पर चल रहा है अवैध मिट्टी खनन का अनोखा खेल

बीना रिफाइनरी विस्तार का कार्य जितनी तेजी से जारी है, उतनी ही तेजी से आसपास की जमीनों से मिट्टी की खुदाई चल रही है। रिफाइनरी के चारों ओर जेसीबी मशीनें और मिट्टी से लदे डंपर दिखाई देने लगे हैं। पेट्रोकेमिकल प्लांट में लेवलिंग का काम कर रहीं कंपनियां फिलिंग की व्यवस्था करा रही हैं। यहां लाखों मीट्रिक टन भराव किया जाना है। दो सालों से गर्मियों में यह काम तेजी से किया जाता है। वर्षा में पिचिंग हो जाती है, इस पूरे काम में खनिज विभाग परिवहन की अनुमति तो दे देता है, लेकिन खनन की कोई अनुमति नहीं होती है। जमीन मालिक और कंपनियों की जुगलबंदी से खेत तालाबों की खुदाई के नाम पर खेतों से मिट्टी निकाल ली जाती है। इस खेल के चलते आसपास की जमीनों से मृदा उठाकर खेतों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जा रहा है। पर्यावरण विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हर तरफ गड्ढे और खाईयां दिखाई दे रही हैं। यह काम परमिशन पर तो होता है, लेकिन जांच और मानिटरिंग के अभाव में घाल मेल किया जाता है। जानकारी के अनुसार, बीआरसी और सारथी कंपनी द्वारा रिफाइनरी विस्तार में लैविलिंग का काम जारी है। यह काम 2024 से चल रहा है जिसमें अलग-अलग साईटों पर काम किए गए और अब भी जारी हैं।

मिट्टी की खुदाई का काम हर साल फसलों की कटाई के बाद जून माह तक वर्षा होने तक जारी रहता है। जब खेत खाली हो जाते हैं तो मुख्य मार्गों से कई खेतों को पार करते हुए अंदर की तरफ खुदाई शुरू हो जाती है। यहां सारा काम गुपचुप तरीके से चलता है। ग्रामीणों ने बताया कि हमारे पास पूरी अनुमतियां हैं। कंपनी काम कर रही है। असल में कंपनियों द्वारा दिए गए प्रतिवेदनों पर मिट्टी और मुरम के परिवहन की अनुमित दे दी जाती है। जबकि मौके पर पहले से न तो मिट्टी होती है और न ही स्टाक। जानकारी के अनुसार, इसके लिए एक तरफ राजस्व विभाग से खेत तालाब और डबरी खोदने की अनुमति ली जाती है इसके बाद खनिज विभाग से परिवहन की अनुमति मिलने पर काम शुरू हो जाता है। हड़कल तालाब में भी इसी तरह मिट्टी उठाई जा रही है। पूर्व में भी कार्रवाईयां सामने आई, लेकिन वह भी जून माह में हुईं जब वर्षा के दौरान स्वतः ही खुदाई बंद हो जाती है।