चने की इल्ली से फसल को बचाएं, किसान रहे सावधान
इस समय चने की फसल पर इल्ली (फली छेदक कीट) का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। डॉ. द्वारका एवं रूपेन्द्र सिंह द्वारा खेतों का निरीक्षण कर बताया गया कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचा सकता है। डॉ . द्वारका ने किसानों को सतर्क रहने और तुरंत बचाव उपाय अपनाने की सलाह दी है। इल्ली लगने के मुख्य कारण में अधिक नमी व ठंडा मौसम, देर से बोई गई फसल, खेत में खरपतवार की अधिकता, संतुलित खाद व दवा का अभाव, लगातार एक ही फसल बोना है। इल्ली के प्रमुख लक्षण में पत्तियों में गोल-गोल छेद होना, फूल और फलियों का झड़ना, फलियों में छेद कर अंदर से दाना खाना, खेत में हरी-भूरी रंग की मोटी इल्ली दिखाई देना व उपज में अचानक गिरावट होना प्रमुख है। इल्ली से होने वाला नुकसान की बात करें तो इल्ली सीधे फलियों पर हमला करती है, जिससे चने का दाना खराब हो जाता है। एक इल्ली कई फलियाँ नष्ट कर सकती है। समय पर नियंत्रण न होने पर 30 से 50 प्रतिशत तक पैदावार घट सकती है। इल्ली से बचाव के प्रभावी उपायों की हम बात करे तो देशी व जैविक उपाय में 5–6 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाएँ, नीम तेल 3–5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव, पक्षियों के बैठने के लिए टी-आकार की लकड़ी लगाएँ। अंडों और इल्ली को हाथ से नष्ट करें। रासायनिक नियंत्रण की बात करें तो इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर या स्पिनोसैड 45 एससी 0.3 मिली प्रति लीटर या इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी 1 मिली प्रति लीटर का छिड़कर किसान भाई कर सकते है। दवा का छिड़काव शाम के समय करें और एक ही दवा बार-बार न प्रयोग करें।
डॉ . द्वारका (कीटशास्त्र विभाग, कृषि महाविद्यालय, पन्ना) का कहना है कि समय पर निगरानी और समन्वित कीट प्रबंधन अपनाने से इल्ली पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। किसान भाई नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर 7773879233 से संपर्क कर सकते है , तथा विश्वसनीय दवाओं हेतु ठाकुर रूपेंद्र सिंह से उनके मोबाइल नंबर 93405 00081 पर संपर्क कर सकते है। चने की इल्ली एक गंभीर समस्या है, लेकिन सही जानकारी, समय पर कार्रवाई और उचित बचाव उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
संवाददाता :- रविन्द्र दांगी

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