नेहरू शताब्दी चिकित्सालय जयंत में एनसीएल कर्मी की इलाज के अभाव में मौत, जमकर हुआ हंगामा
परिजनों का आरोप है कि रामकृष्ण विश्वकर्मा को जब सुबह अचानक सीने में दर्द हुआ, तो उन्हें तत्काल नेहरू शताब्दी चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड लाया गया। लेकिन वहां कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। काफी देर तक मरीज तड़पता रहा, लेकिन न तो डॉक्टर आए और न ही प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। परिजनों का कहना है कि मौत के बाद डॉक्टर पहुंचे और औपचारिक रूप से सीपीआर देने का नाटक किया गया। यदि समय रहते सीपीआर दी जाती, तो यह मौत नहीं होती। वहीं घटना की जानकारी मिलते ही इंटक नेता पुष्पराज सिंह और ननि अध्यक्ष देवेश पांडेय अस्पताल पहुंचे। उनके पहुंचते ही अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा तेज हो गया। लोगों ने अस्पताल प्रभारी डॉ. पंकज कुमार को जमकर खरी-खोटी सुनाई। नारेबाजी के बीच अस्पताल को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया गया। आरोप लगाया गया कि यह अस्पताल अब गरीबों और मजदूरों के इलाज का नहीं, बल्कि दलालों और निजी हितों का केंद्र बन चुका है।
इलाज नहीं, पर्ची लोकल दवाइयां, नही आते समय पर चिकित्सक
इंटक नेता पुष्पराज सिंह का आरोप है कि नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में चिकित्सक समय पर ड्यूटी नहीं आते, मरीजों को ठीक से देखते नहीं और केवल लोकल मेडिकल स्टोर की दवाइयां लिखकर खानापूर्ति कर दी जाती है। इमरजेंसी वार्ड जैसी संवेदनशील जगह पर डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, पहले भी इलाज में देरी से मरीजों की जान जा चुकी है। वहीं लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रभारी डॉ. पंकज कुमार चिकित्सालय की व्यवस्था संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। अस्पताल में दलालों का बोलबाला है और आम मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। घटना के बाद भी जब तकड़़ी कार्रवाई नहीं हुई, तब तक आक्रोश शांत नहीं हुआ। लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले।
पुलिस ने दिया दखल, ननि अध्यक्ष एवं इंटक के प्रदेश यूथ अध्यक्ष
मृतक के परिजनों और यूनियन नेताओं ने इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग की। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे आपराधिक लापरवाही का मामला है। मौके पर जयंत चौकी प्रभारी सुधाकर सिंह पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। इसी दौरान अस्पताल में लगे सीसीटीव्ही कैमरों को लेकर भी संदेह जताया गया। आरोप है कि कैमरे होते हुए भी सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। वहीं ननि अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के साथ-साथ इंटक नेता पुष्पराज सिंह ने भी चिकित्सको को जमकर खरीखोटी सुनाते हुये कहा कि यहां गरीबो का इलाज नही होता है, यह चिकित्सक मनमानी पर उतारू हैं। यह रवैया ठीक नही है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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