जिले में गौशाला योजना की प्रगति कागजों में, अन्नदाता परेशान, फसलों पर मवेशियों का कहर


सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और किसानों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई गौशाला योजना जमीनी हकीकत में पूरी तरह नाकाम साबित होती नजर आ रही है। 

 जिले भर में हजारों की संख्या में आवारा मवेशी खेतों में घूम रहे हैं और रातों-रात किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। गेहूं, चना, सरसों से लेकर सब्जियों तक की फसलें मवेशियों के झुंड के सामने टिक नहीं पा रहीं। नतीजा यह है कि किसान खेती छोड़ने या भारी नुकसान सहने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति यह है कि दिन में खेतों में काम करने वाला किसान रात भर पहरा देने को विवश है। कई गांवों में किसान बारी-बारी से खेतों की रखवाली कर रहे हैं, फिर भी मवेशियों के हमलों से पूरी तरह बचाव संभव नहीं हो पा रहा। हजारों-हजार एकड़ फसल हर साल बर्बाद हो रही है, लेकिन न तो ठोस आंकड़े सामने आ रहे हैं और न ही किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय हो रही है। गौवंश संरक्षण को लेकर सरकार स्पष्ट निर्णय नहीं ले पा रही है। एक ओर गौहत्या पर सख्त कानून हैं, दूसरी ओर निराश्रित गौवंश के भरण-पोषण और प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। गौशालाएं कागजों में तो संचालित दिखती हैं, लेकिन अधिकांश गौशालाओं में न पर्याप्त चारा है, न पानी और न ही पशु चिकित्सकीय सुविधा। कई जगह क्षमता से अधिक मवेशी ठूंस दिए गए हैं, जिससे उनकी मौत की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।

संवाददाता :- आशीष सोनी