चार घंटे का धरना, आंदोलन की चेतावनी, सैकड़ों छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर में धरना देकर जताया विरोध
छात्राओं का सबसे गंभीर आरोप महाविद्यालय के आसपास फैली अराजकता को लेकर है। सुबह कॉलेज खुलने से लेकर दोपहर 3 बजे तक महाविद्यालय के बाहर मोटरसाइकिलों पर घूमते मनचलों का जमावड़ा लगा रहता है। छात्राओं का कहना है कि ये तथाकथित रोमियो खुलेआम फब्तियां कसते हैं, घूरते हैं और माहौल को असुरक्षित बना देते हैं। हैरानी की बात यह है कि महज 300 मीटर की दूरी पर कोतवाली स्थित होने के बावजूद पुलिस का गश्त नाममात्र भी नहीं होता। महिला पुलिस तो दूर, साधारण भ्रमण तक नजर नहीं आता। वहीं छात्राओं ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस लापरवाही से अराजक तत्वों के हौसले बुलंद हैं और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई भी बड़ी घटना घट सकती है। छात्राओं ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा के नाम पर महाविद्यालय पूरी तरह भगवान भरोसे है। सुरक्षा के साथ-साथ पढ़ाई की स्थिति भी बदहाल है। छात्राओं ने बताया कि महाविद्यालय में स्थाई प्रोफेसरों की भारी कमी है। कई विषयों में नियमित शिक्षक ही नहीं हैं, जिससे कक्षाएं या तो लगती नहीं या औपचारिकता निभाकर छोड़ दी जाती हैं। परीक्षा नजदीक होने के बावजूद पढ़़ाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। छात्राओं ने इसे अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
छात्राओं ने ताला बंदी की दी चेतावनी
धरने पर बैठी छात्राओं ने शासन-प्रशासन के खिलाफ अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर नारेबाजी की। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की महाविद्यालय इकाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ज्ञापन सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि आखिरी चेतावनी है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो कॉलेज परिसर में तालाबंदी कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और शासन की होगी। अब सवाल यह है कि क्या 300 मीटर दूर बैठी कोतवाली की नींद टूटेगी, क्या प्रशासन छात्राओं की चेतावनी को गंभीरता से लेगा या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे, फिलहाल कन्या महाविद्यालय की छात्राएं जवाब नहीं, कार्रवाई चाहती हैं।
कन्या महाविद्यालय में अध्यापको का टोटा
ज्ञापन में महाविद्यालय गेट पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, परिसर में महिला सुरक्षा व्यवस्था, नियमित पुलिस गश्त, सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सभागार निर्माण, लंबे समय से लंबित भवन मरम्मत, पुस्तकालय में नवीन पुस्तकों की उपलब्धता, छात्राओं के आवागमन के लिए बस सुविधा और प्रभारी प्राचार्य के स्थान पर स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति जैसी मांगें प्रमुखता से रखी गईं। मांगों को लेकर छात्राओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने करीब चार घंटे तक महाविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान महाविद्यालय प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। छात्राओं का कहना था कि जब कन्या महाविद्यालय तक सुरक्षित नहीं रहेगा तो बेटियों की शिक्षा की बातें महज खोखले नारे साबित होंगी।
इनका कहना:-
धरना के बारे में पहले से कोई जानकारी नही दी गई थी। जानकारी मिलते ही मैं वहां गया और छात्राओं के साथ-साथ एबीव्हीपी ने समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौपा है।
डॉ. एमयू सिद्धिक्की
प्राचार्य, डिग्री कॉलेज, बैढ़न
संवाददाता :- आशीष सोनी

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