इंदौर से दिल्ली तक मजबूत पकड़ अब सियासत में नई चुनौती, तेवरों की राजनीति या रणनीति की तैयारी..?
भोपाल:- कैलाश विजयवर्गीय लंबे समय तक मध्य प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं इंदौर की नगर राजनीति से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक उनकी सक्रियता ने उन्हें भाजपा का मजबूत रणनीतिकार बनाया छह बार विधायक और कई वर्षों तक मंत्री रहने के बाद भी उनका राजनीतिक सफर आज नए मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है
ताकत जो पहचान बनी
संगठन पर मजबूत पकड़, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और चुनावी रणनीति में महारत ये उनकी सबसे बड़ी ताकत रही हैं इंदौर में उनका प्रभाव ऐसा रहा कि वे जिस सीट पर खड़े हों, वहां समीकरण बदल जाते थे। परिवार और करीबी सहयोगियों को राजनीति में स्थापित करना भी उनकी रणनीतिक क्षमता का हिस्सा माना गया।
भाषा से बनी दूरी
हाल के दिनों में विवादित बयानों ने उनके व्यक्तित्व के आक्रामक पक्ष को फिर चर्चा में ला दिया है राजनीतिक मंचों से तीखे शब्दों का इस्तेमाल, प्रतिद्वंद्वियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां इन सबने विरोधियों को सवाल उठाने का मौका दिया है बदलते राजनीतिक माहौल में संयमित भाषा को ही परिपक्व नेतृत्व की पहचान माना जाता है।
सत्ता के भीतर की हलचल
कैबिनेट विस्तार और इस्तीफे की चर्चाओं ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है शीर्ष नेतृत्व से तालमेल को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं हालांकि राजनीति में संकेत अक्सर सीधे नहीं होते कई बार बदलाव दिखता कुछ है और रणनीति कुछ और होती है
निर्णायक समय
यह दौर उनके लिए आत्ममंथन का भी हो सकता है अनुभव उनके पास है, जनाधार भी कम नहीं सवाल सिर्फ इतना है कि क्या वे अपने तेवरों को नई राजनीति की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं ढाल पा रहे है
राजनीति में स्थायी कुछ भी नहीं - न सत्ता, न दूरी अगला कदम ही तय करेगा कि यह कहानी विराम है या वापसी की प्रस्तावना...
संवाददाता: राजकुमारी ठाकुर

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