आदिवासी महिलाओं को झूठा साबित करने की साजिश
महिलाओं का कहना है
हम लोगों ने अधिकारियों के व्यवहार और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर शिकायत की थी, लेकिन अब उसी शिकायत को कमजोर करने के लिए तथाकथित खंडन चाटुकारों के जरिए उल्टी कहानी गढ़ाई जा रही है। कुछ लोग प्रशासन के करीबी बनकर सोशल मीडिया के जरिए गांव में ऐसी खबरें फैला रहे हैं, जिनसे यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि हम महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं।
सच्चाई दबाने की कोशिश
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपने साथ हुए कथित अपमान और दुर्व्यवहार को लेकर किसी तरह आवाज उठाई थी कि शायद कोई ईमानदार अधिकारी होगा जो कार्यवाही करेगा, लेकिन अब उन्हें ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। महिलाओं के मुताबिक यदि आरोप झूठे हैं तो निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार
अपमानित महसूस कर रही आदिवासी महिलाएं थाना प्रभारी के नाम रिपोर्ट लिखते हुए सीधे पुलिस अधीक्षक सिंगरौली के पास पहुंचीं और पूरे मामले की लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की है। महिलाओं ने मांग की है कि जो लोग भ्रामक खबरें फैलाकर उन्हें बदनाम कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो।
गांव में बढ़ रहा तनाव
महिला समूह के चुनाव को लेकर गांव में अब दो गुट बनते नजर आ रहे हैं। एक पक्ष महिलाओं के आरोपों को सही बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत विवाद करार दे रहा है। इस खींचा-तानी के कारण गांव एवं एलआरएनएम विभाग का माहौल भी तनावपूर्ण होता जा रहा है।
जांच उपरांत सच आएगा सामने
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में सच्चाई तभी सामने आएगी जब स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी। फिलहाल भ्रष्टाचार में लिप्त प्रेरक एवं खंडन चाटुकारों के खबरों के बाद आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली तथ्य धुंधले होते नजर आ रहे हैं।
अब देखना यह है कि थाना प्रभारी सहित पुलिस कप्तान इस संवेदन शील मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में आदिवासी महिलाओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कार्यवाही कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं।
संवाददाता :- आशीष सोनी


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