बहुप्रतीक्षित बंधा कोल प्रोजेक्ट शुरू होने के इंतजार में सरकार 


सिंगरौली जिले के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाला बहुप्रतीक्षित बंधा कोल प्रोजेक्ट आज भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी द्वारा ग्रामीणों के लिए करीब 629 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा किए जाने के बावजूद जमीन समर्पण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। 

प्रोजेक्ट के अधीन आ रहे गांवो की मासूम जनता को तथाकथित कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए प्रोजेक्ट के विरोध में ना केवल उकसा रहे हैं, बल्कि उन्हें भड़का कर जमीन समर्पण पत्र नहीं सौंपने दे रहे हैं। पेड़ों की कटाई का भी विरोध सुनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब जमीन का हस्तांतरण ही पूरा नहीं होगा, तो आखिर यह बहुचर्चित कोल प्रोजेक्ट जमीन पर कैसे उतर पाएगा। यही नहीं इस प्रोजेक्ट के शुरू नहीं होने से सरकार को लगभग 300 करोड़ रुपए के राजस्व का सालाना नुकसान हो रहा है। वहीं चूंकि प्रोजेक्ट क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा समर्पण पत्र नहीं देने की वजह से कंपनी द्वारा सरकारी खजाने में जमा 600 करोड़ रुपए का भुगतान उन्हें नहीं हो पा रहा। जिसका सीधा आर्थिक नुकसान समुदाय को हो रहा है। तीसरा और सबसे अहम नुकसान है रोजगार और आय के अन्य साधनों के सृजन का। महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी द्वारा बंधा कोल प्रोजेक्ट के अतर्गत प्रशासन द्वारा अवार्ड से अपवर्जित संरचनाओं को भी अनुदान स्वरूप एक निश्चित मुआवजे की राशि देने का फैसला किया गया है, साथ ही प्रोजेक्ट के लिए जिन 800 हेक्टेयर भूमि पर वनों की कटाई वन विभाग द्वारा की जानी है, उसके बदले प्रदेश के विभिन्न जिलों में इतनी ही जमीन सीए लैंड के तहत ली जा चुकी है और उस पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट क्षेत्र की जनता को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके, इसके लिए विस्थापित हो रहे वैसे लोगों को भी पीडीएफ योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिनके पास जमीन का स्वामित्व नहीं था। दूसरी तरफ विस्थापितों के लिए लामिदह में 250 एकड़ जमीन पर आरएंडआर कॉलनी का निर्माण प्रगति पर है, जो स्कूल, अस्पताल, मार्केटिंग कॉम्पलेक्स, सामुदायिक भवन इत्यादि सुविधाओं से लैस होगा। लेकिन हालत यह है, तथाकथित कुछ लोग इस प्रोजेक्ट की दूसरी ही तस्वीर पेश कर रहे हैं, जो हकीकत से काफी दूर है। 3 मार्च 2021 को इस प्रोजेक्ट का आवंटन हुआ था और मई 2025 में माइनिंग लीज भी कंपनी को दे दिया गया। कोयला परियोजना के समय से चालू होने से जिस स्तर पर रोजगार का सृजन होना है। 

रोजगार और औद्योगिक संभावनाओं से वंचित हो रहे लोग

सूत्रों के अनुसार कंपनी ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत मुआवजा राशि पहले ही जमा कर दी है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को समय पर भुगतान किया जा सके। इसके बावजूद जमीन समर्पण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। स्थानीय युवाओं को इस परियोजना से काफी उम्मीदें हैं। क्षेत्र के कई युवाओं का मानना है कि अगर यह प्रोजेक्ट शुरू होता है तो उन्हें अपने ही जिले में रोजगार का अवसर मिल सकता है और बाहर पलायन की जरूरत कम होगी। औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाएं किसी भी पिछड़े या अर्धविकसित क्षेत्र के लिए आर्थिक बदलाव का आधार बनती हैं। बंधा कोल प्रोजेक्ट सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि जिले के आर्थिक भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। लेकिन जमीन समर्पण में हो रही देरी ने जिले के आद्योगिक विकास के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रोजेक्ट के शुरू न होने से सभी संभावनाएं अधर में

कई नागरिको का मानना है कि बंधा कोल प्रोजेक्ट को सिंगरौली और म.प्र. के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक निवेशों में गिना जा रहा है। इस परियोजना से न केवल कोयला उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, छोटे व्यवसाय और आधारभूत संरचना के विकास के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े उद्योग के आने से आसपास के क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। परिवहन, ठेका कार्य, स्थानीय बाजार और सेवा क्षेत्र में भी तेजी आती है। लेकिन बंधा कोल प्रोजेक्ट के शुरू नहीं हो पाने से ये सभी संभावनाएं फिलहाल अधर में लटकी हुई हैं।

संवाददाता :- आशीष सोनी