केन-बेतवा परियोजना: 11 दिनों से जारी बड़ा जनआंदोलन, मुआवजा व पुनर्वास पर उठे गंभीर सवाल



मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान समुदाय का आंदोलन पिछले 11 दिनों से लगातार जारी है। यह आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें ढोढन, पलकोआ सहित 14 गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हैं।

आंदोलनकारी अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे हैं—जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह, चूल्हा बंद आंदोलन, चिता सत्याग्रह और “छिटा आंदोलन” जैसे प्रतीकात्मक तरीके अपनाकर वे जमीन पर लेटकर अपना विरोध जता रहे हैं। इसके बावजूद अब तक प्रशासन या राजनीतिक स्तर पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा नहीं मिला और पुनर्वास की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं है। कई स्थानों पर मकान तोड़ दिए गए हैं और निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन प्रभावित परिवार अभी भी असुरक्षा और अनिश्चितता में जी रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े और लगातार 11 दिनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद न तो शीर्ष नेतृत्व और न ही राज्य स्तर पर कोई ठोस हस्तक्षेप दिखाई दे रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है।

जनता के सवाल

इस आंदोलन ने सरकार और प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

क्या प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की योजना पहले से पूरी तरह तैयार थी?

11 दिनों से जारी आंदोलन के बावजूद संवाद और समाधान की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है?

क्या विकास परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की सहमति और हितों की अनदेखी हो रही है?

क्या आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की आवाज को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है?

डुगरिया में विस्थापन प्रक्रिया

इसी परियोजना के तहत ग्राम डुगरिया में प्रशासन ने मुआवजा मिलने के बाद 14 मकानों को हटाने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की। कुछ ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपने घर हटाए, जबकि कुछ ने पहले से वैकल्पिक व्यवस्था कर ली थी।

विकास बनाम विस्थापन

केन-बेतवा परियोजना देश की प्रमुख सिंचाई और जल प्रबंधन योजनाओं में शामिल है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या विकास की इस प्रक्रिया में प्रभावित लोग पीछे छूट रहे हैं।

आंदोलनकारी साफ कह रहे हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

संवाददाता:- स्वाति रजक