हड़ताल खत्म, लेकिन मुश्किलें जारी: इंदरगढ़ मंडी में अव्यवस्था और किसानों की बढ़ती चिंता


मध्यप्रदेश के दतिया जिले की इंदरगढ़ कृषि उपज मंडी में तीन दिनों से चल रही पल्लेदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन इसके बाद जो हालात बने, उन्होंने नई समस्याओं को जन्म दे दिया है।

हड़ताल खत्म होने के साथ ही मंडी में गतिविधियां दोबारा शुरू हुईं, लेकिन अचानक बढ़ी आवक ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। दोपहर 12 बजे के बाद जैसे ही डाक बोली शुरू हुई, बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचने लगे, जिससे ग्वालियर-इंदरगढ़ रोड पर लंबा जाम लग गया। सड़क पर वाहनों की कतारें और मंडी परिसर के आसपास फैली अव्यवस्था ने आम लोगों और किसानों दोनों को परेशान कर दिया।

हड़ताल खत्म, पर राहत नहीं

पल्लेदारों और व्यापारियों के बीच मजदूरी बढ़ाने को लेकर सहमति बनते ही काम फिर शुरू हो गया। मंडी सचिव विक्रम जाटव के अनुसार, पल्लेदारों की मांग मानते हुए मजदूरी में 2 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद हड़ताल समाप्त हो गई। वहीं व्यापारी संघ अध्यक्ष रामप्रकाश गुप्ता ने भी सभी शर्तें मानने की बात कही।

लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ हड़ताल खत्म होने से समस्याएं खत्म हो जाती हैं? हकीकत इससे अलग नजर आई।

अचानक बढ़ी आवक से बिगड़ी व्यवस्था

तीन दिन तक रुके हुए किसान जैसे ही मंडी खुली, अपनी उपज लेकर एक साथ पहुंच गए। इस अचानक बढ़ी भीड़ के लिए न तो पर्याप्त व्यवस्था थी और न ही यातायात नियंत्रण की कोई ठोस योजना। परिणामस्वरूप सड़क जाम, अव्यवस्था और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

किसानों की दोहरी मार

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा। एक तरफ ओलावृष्टि से पहले ही फसल प्रभावित हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर मंडी में उन्हें अपनी उपज के उचित दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि व्यापारी अधिक आवक का फायदा उठाकर मनमाने भाव पर खरीद कर रहे हैं। गेहूं का दाम 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल तक सीमित रखा गया है। इसके अलावा तुलाई के नाम पर प्रति क्विंटल 25 रुपए और एक किलो अतिरिक्त गेहूं लेने की शिकायत भी सामने आई है।

व्यवस्था पर उठते सवाल

यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है—
क्या मंडी प्रशासन अचानक बढ़ने वाली आवक के लिए तैयार नहीं था?
क्या किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है?
और क्या बाजार में पारदर्शिता की कमी है

संवाददाता : किशोर कुशवाहा