2016 से न्याय की गुहार, फिर भी नहीं समाधान: कलेक्ट्रेट में महिला ने डीजल डालकर आत्मदाह की कोशिश, सिस्टम पर उठे सवाल
सागर कलेक्ट्रेट परिसर मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब जनसुनवाई में पहुंची एक महिला ने अचानक खुद पर डीजल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए महिला को रोक लिया और बड़ी घटना होने से टल गई।
महिला लगातार चिल्लाते हुए कह रही थी कि वह 2016 से अपनी समस्या को लेकर परेशान है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला। उसने चेतावनी दी कि अगर आज भी उसकी सुनवाई नहीं हुई तो वह अपनी जान देने को मजबूर हो जाएगी।
जाति प्रमाण पत्र विवाद बना वजह
सागर जिले के जरुआखेड़ा निवासी राधा यादव ने आरोप लगाया है कि उनके शैक्षणिक दस्तावेजों में जाति दर्ज करने में गलती हुई है। मार्कशीट में उनकी जाति ‘सौर (आदिवासी)’ दर्ज है, जबकि वह खुद को यादव जाति का मानती हैं।
राधा का कहना है कि इसी त्रुटि के कारण वह लंबे समय से परेशान हैं और कई सरकारी अवसरों से वंचित हो रही हैं। संविदा शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा में शामिल न हो पाने और प्रोफाइल न बन पाने की समस्या भी इसी वजह से बताई जा रही है।
2016 से लगातार भटक रही पीड़िता
महिला ने बताया कि वह 2016 से लगातार जनसुनवाई और दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा, जहां जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
राधा का आरोप है कि हर बार उसे केवल आश्वासन ही मिलता है, कार्रवाई नहीं होती। इसी निराशा में उसने यह कदम उठाने की कोशिश की।
प्रशासन का पक्ष
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि महिला के सभी दस्तावेजों में जाति ‘सौर’ दर्ज है और इसी आधार पर रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में भी विचाराधीन रहा है और विभागीय स्तर पर उनके पास बदलाव का अधिकार सीमित है।
सवाल अब सिस्टम पर
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेज सुधार प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या एक छोटी-सी त्रुटि के सुधार के लिए किसी नागरिक को सालों तक भटकना जरूरी है?
और जब अदालत के आदेश के बावजूद समाधान नहीं निकलता, तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
संवाददाता: स्वाति रजक

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