जनसुनवाई में फूटा लोगों का गुस्सा, जमीन कब्जा और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
दतिया | दतिया कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। हर बार की तरह इस बार भी सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन से जुड़े विवादों की रहीं, जिनमें सीमांकन, अवैध कब्जा और बंटवारे के मामले प्रमुख थे। इसके अलावा आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों को लेकर भी लोगों ने अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी।
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समय-सीमा में समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण करना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जमीन सीमांकन और कब्जे के मामलों ने बढ़ाई चिंता
जनसुनवाई में ग्राम गणेशखेड़ा निवासी ओमप्रकाश यादव ने अपने खेत के सीमांकन को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि सर्वे नंबर 653 में उनके नाम की जमीन है, जिसका सीमांकन पहले आंशिक रूप से हो चुका है। दो खसरों में से एक का सीमांकन पूरा हो गया है, लेकिन दूसरा हिस्सा अभी भी विवादित बना हुआ है।
ओमप्रकाश यादव ने आरोप लगाया कि सीमांकन में देरी के कारण पड़ोसी उनकी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पुलिस बल की मौजूदगी में सीमांकन कराया जाए, ताकि किसी प्रकार का विवाद न हो और उनकी जमीन सुरक्षित रह सके। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करें और पुलिस सुरक्षा में सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कराएं।
जमीन से जुड़े ऐसे मामले जनसुनवाई में लगातार सामने आते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड और सीमांकन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की जरूरत है।
पति की मौत के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही महिला की गुहार
रिछरा फाटक निवासी सायरा वानो ने जनसुनवाई में अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके पति की कैंसर के कारण मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है और बेटी की शादी की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है।
सायरा वानो ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई मदद नहीं मिली और उनकी आवेदन प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।
इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि महिला के प्रकरण की जांच कर तत्काल पात्रता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विधवा, गरीब और जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिया जाना चाहिए।
दो साल से लंबित जमीन बंटवारा, रिश्वत के आरोप
इंदरगढ़ तहसील के ग्राम उंचिया निवासी रामचरन अहिरवार ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनकी जमीन के बंटवारे की फाइल पिछले दो वर्षों से लंबित थी, जिसे बाद में बिना उचित कारण के निरस्त कर दिया गया।
रामचरन अहिरवार का आरोप है कि संबंधित पटवारी द्वारा उनसे रिश्वत की मांग की गई थी। जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो जानबूझकर उनकी फाइल पर कार्रवाई रोक दी गई और अंततः उसे निरस्त कर दिया गया।
इस मामले को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए और कहा कि यदि रिश्वतखोरी या जानबूझकर देरी करने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नसबंदी ऑपरेशन फेल, दो साल से मुआवजा लंबित
ग्राम इमिलिया निवासी भगवान सिंह अहिरवार ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
भगवान सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वे लगातार स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। इस मामले में कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को निर्देश दिए कि प्रकरण की जांच कर पात्रता के अनुसार मुआवजा राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं में ऐसी लापरवाही और मुआवजा प्रक्रिया में देरी न केवल पीड़ित परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनती है, बल्कि यह सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
दबंगों द्वारा कब्जा और जान से मारने की धमकी
बड़ौनी तहसील के सिजोरा गांव निवासी प्रानसिंह रावत ने अपनी शिकायत में बताया कि कुछ दबंगों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा और कब्जा हटाने की मांग की। कलेक्टर ने इस मामले में पुलिस और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि पीड़ित को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
खड़ी फसल काटकर ले जाने का आरोप
बहादुरपुर निवासी ज्ञान सिंह दांगी ने अपने साझेदारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने उनकी खड़ी गेहूं और चने की फसल को जबरन काट लिया और अपने घर ले गए।
ज्ञान सिंह ने कहा कि यह पूरी घटना उनकी अनुपस्थिति में हुई और जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया। कलेक्टर ने इस मामले में जांच के निर्देश देते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई: आम जनता की उम्मीद का मंच
दतिया कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम जनता के लिए अपनी समस्याओं को सीधे प्रशासन के सामने रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हर मंगलवार को आयोजित होने वाली इस जनसुनवाई में जिले के विभिन्न हिस्सों से लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन मामलों का समाधान निचले स्तर पर नहीं हो पा रहा है, उन्हें उच्च स्तर पर सुना जाए और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी आवेदनों का रिकॉर्ड रखा जाए और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि कोई भी मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
प्रशासन की जिम्मेदारी और जवाबदेही
जनसुनवाई के दौरान सामने आने वाली शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर करती हैं। जमीन विवाद, भ्रष्टाचार के आरोप, योजनाओं का लाभ न मिलना और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही जैसे मुद्दे यह संकेत देते हैं कि सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर समस्याओं का समाधान करें और आम जनता के साथ संवेदनशील व्यवहार रखें।
संवाददाता : किशोर कुशवाहा

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