सिंगरौली जिले में पिछले वर्ष 2023-24 से 2025 के बीच लाखों के क्षतिग्रस्त हुये थे स्टाफ डेम
दरअसल जिले में वर्ष 2020 से लेकर 2025 तक ताबड़तोड़ ग्राम पंचायतो में स्टाफ डेम की मंजूरी जिला पंचायत के द्वारा परफॉमेंस मद से दी गई थी। आलम यह था कि कई ग्राम पंचायतों में दो से तीन स्टाफ डेम मंजूर किये गये थे, उस दौरान स्टाफ डेम व चेक डेम की स्वीकृति दिये जाने को लेकर जिला पंचायत सिंगरौली सुर्खियों में था। तत्कालीन सीईओ साकेत मालवीय से लेकर गजेन्द्र सिंह नागेश भी चर्चाओं में रहे हैं। इस दौरान देवसर चितरंगी ब्लॉक में करीब एक सैकड़ा स्टाफ डेम 2022 से लेकर 2024-25 के बीच ध्वस्त हो गये थे। देवसर के नौढ़िया, चितरंगी के पराई समेत कई ऐसे ग्राम पंचायत हैं, जहां लाखों रूपये से निर्मित स्टाफ डेम पहली बारिश में ध्वस्त हो गई थी। उसका मुख्य कारण गुणवत्ता विहीन कार्य एवं कमीशनखोरी है। आरोप है कि कथित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव एवं जीआरएस के साथ-साथ उपयंत्री एवं सहायक यंत्री के कमीशनखोरी एवं राशि की बंदरबाट की गई, जिसके चलते लाखों रूपये की लागत से बने स्टाफ डेम क्षतिग्रस्त हो गये। बताया जाता है कि जिले के कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कई बार कलेक्टर के जनसुनवाई में की गई, लेकिन पूर्व में पदस्थ कलेक्टर शिकायत पत्र को जिला पंचायत की ओर भेज दे रहे थे, परंतु एक भी शिकायतो पर जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ ने गंभीरता नही दिखाई और न ही जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई करने की जहमति नही उठाई और यदि कार्रवाई भी किया हो तो जिला पंचायत दफ्तर तक ही सीमित रह गई। अब यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है कि ध्वस्त एक सैकड़ा स्टाफ डेमो की जांच वर्तमान जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे कराएंगे, यह तो आने वाले वक्त ही बताएगा।
मेरे जानकारी में नही, जांच कराई जाएगी: जगदीश
देवसर पहुंचे जिला पंचायत सीईओ से मीडिया कर्मियों ने जिले में गुणवत्ता विहीन बने स्टाफ डेम के ध्वस्त होने के सवाल पर कहा कि मेरी जानकारी में नहीं है, आप लोगों ने बताया है, मैं चार-पांच साल के भीतर जो भी स्टाफ डेम बने हैंं, उनको आईडेंटिफाई करके जो भी टेक्निकल कमी की वजह से ध्वस्त हो गए हैं, जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाएगी। साथ ही स्टाफ डैम की क्षमता को बढ़ाने के दिशा पर भी काम किया जाएगा। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे के इस बयान के बाद अब मामला तूल पकड़ सकता है और यदि निष्पक्ष पारदर्शिता के साथ जांच हुई तो कई पंचायतो के सरपंच, सचिव, उपयंत्री, सहायक यंत्री एवं जीआरएस कार्रवाई के लपेटे में आ सकते हैं।
शिकायकर्ताओं का प्रशासन से उठा विश्वास
जिले के देवसर और चितरंगी विकासखंड में वर्ष 2023 से 2025 के बीच निर्मित एक सैकड़ा से अधिक स्टाफ डेमों के ध्वस्त होने का मामला फिर सुर्खियों में है। लाखों रुपये की लागत से बने ये निर्माण कार्य पहली ही बारिश में ढह गए, जिससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने कई बार जनसुनवाई और जिला पंचायत में शिकायतें दर्ज कराई थीं। आरोप है कि पूर्व में पदस्थ अधिकारियों ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और न ही किसी प्रकार की निष्पक्ष जांच कराई गई। इससे शिकायतकर्ताओं में भी निराशा का माहौल बना रहा। देवसर के नौढ़ि़या और चितरंगी के पराई सहित कई पंचायतों में बने स्टाफ डेम पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गुणवत्ता विहीन निर्माण, तकनीकी लापरवाही और कथित कमीशनखोरी के कारण लाखों रुपये की राशि व्यर्थ चली गई।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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