“अपने घर में ही गंदा पानी!”—22 दिन में दोबारा नल से निकले कीड़े, इस्तीफे की चेतावनी से हिला निगम, रातोंरात बदला कनेक्शन 


सागर शहर में पेयजल व्यवस्था की पोल खोल देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सिविल लाइन वार्ड के इंद्रानगर में नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर मनीष बोहरे के घर महज 22 दिनों के भीतर दोबारा नल से कीड़े निकल आए। यह घटना सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रही है।

सबसे बड़ी बात—जिस व्यक्ति को शहर में स्वच्छता का चेहरा बनाया गया, वही अपने घर में साफ पानी के लिए तरस रहा है।

घटना के बाद नाराज़ मनीष बोहरे ने निगम अधिकारियों को साफ चेतावनी दे दी—

"जब मैं ही अपने घर में साफ पानी नहीं दिला पा रहा, तो इस पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं"

उनके इस्तीफे की चेतावनी ने निगम में हड़कंप मचा दिया। आनन-फानन में अधिकारी, इंजीनियर और टाटा एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची। हालात संभालने के लिए तुरंत उनका नल कनेक्शन दूसरी लाइन से जोड़ दिया गया और पूरी पाइपलाइन की फिर से जांच कराई गई।

लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता…

पहले भी हो चुकी है यही गलती

29 मार्च को भी इसी घर के नल से कीड़े निकलने का मामला सामने आया था। उस समय पाइपलाइन की सफाई कराई गई, सैंपल जांच में पानी “साफ” बताया गया और दोष नल कनेक्शन पर डालकर मामला दबा दिया गया।

लेकिन हकीकत 19 अप्रैल को फिर सामने आ गई—जब उसी घर के नल से दोबारा कीड़े निकल आए।

 तीसरी बार शिकायत, तब जागा सिस्टम

मनीष बोहरे का कहना है कि बीच में भी एक बार ऐसी ही शिकायत की गई थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। तीसरी बार मामला सामने आने के बाद उन्होंने सख्त रुख अपनाया—तभी जाकर सिस्टम हरकत में आया।

इस्तीफा टला, लेकिन भरोसा टूटा

निगम अधिकारियों ने उन्हें समझाकर इस्तीफा देने से रोक लिया है। दावा किया जा रहा है कि नई लाइन से कनेक्शन जोड़ने के बाद अब समस्या नहीं आएगी।

लेकिन बड़ा सवाल ये है—क्या सिर्फ एक घर का कनेक्शन बदल देने से पूरे शहर की समस्या खत्म हो जाएगी?

 46 किमी जर्जर लाइन और ‘टेंडर गेम’ में फंसा समाधान

सागर में पानी की असली समस्या कहीं ज्यादा गहरी है।

करीब 46 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन लीकेज और जर्जर हालत में है। दूसरी तरफ, नई डाली गई लाइनों से भी दूषित पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

नगर निगम परिषद में इस मुद्दे पर कई बार हंगामा हो चुका है। पार्षद लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अभी भी टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर मामले को टाल रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल

जब शहर का स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर ही अपने घर में साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहा है,

तो आम लोगों के घरों में पहुंच रहा पानी कितना सुरक्षित है?

यह घटना सिर्फ एक मोहल्ले की नहीं, बल्कि पूरे सागर की हकीकत बयां कर रही है—

जहां “साफ पानी” अब दावा नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल बन चुका है।

संवाददाता:- स्वाति रजक