कांग्रेस जिलाध्याक्षों का रिपोर्ट कार्ड तैयार, खराब परफॉर्मेंस वालों के नाम भी आए सामने, दिल्ली से मिलेगी ईनाम या सजा

राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जिनके परफामेंस से संगठन खुश है। हाल ही में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्‌डी की चार दिवसीय समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है। ।

सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के सभी नगर और ग्रामीण जिलाध्याक्षों को संगठन की ओर से टास्क दिया गया था, समय-समय पर प्रदर्शन, कार्यक्रम करते रहें, इसके अलावा जनता की बीच जाकर सामंजस्य स्थापित करें। एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व में ऐसे जिलाध्यक्षों की भी रिव्यू रिपोर्ट भेजी जा रही है। वहीं बताया जा रहा है कि दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो जबलपुर ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव प्रदेश के टाप उन जिलाध्यक्षों में शामिल हैं, जिनके काम से संगठन संतोष है। जबलपुर ग्रामीण में 15 ब्लाक और 113 मंडलम बनाए गए हैं। जहां पर संजय यादव लगातार संपर्क में जुटे हुए हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि संगठन की ओर से हर माह टास्क दिए जाते हैं, जिसकी रिपोर्ट कनेट सेंटर भेजी जाती है। बीते 17 अप्रैल को भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश प्रभारी वामसी रेड्डी ने बैठक लेकर रिव्यू तैयार किया था।

सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्षों में प्रियव्रत सिंह-राजगढ़, महेश परमार-उज्जैन, मनीष चौधरी-देवास ग्रामीण और रवि नायक खरगौन की परफामेंस अच्छी है, इसके अलावा अन्य जिला अध्यक्षों का भी रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है। जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओंमकार सिंह मरकाम (जिलाध्यक्ष डिंडोरी), सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह (जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले (जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हैं।