बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला, 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे ने कहा था- मैं अब भी कांग्रेस में हूं। इस बयान को हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में लिया है। मामले में याचिकाकर्ता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सप्रे के बीजेपी में शामिल होने के सबूत पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इस पर सिंघार ने जवाब देते हुए कहा कि वे 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप की प्रतियां प्रस्तुत करेंगे। मामले की हाईकोर्ट सुनवाई 20 अप्रैल को हुई। जिसमें सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सुनवाई नहीं हो सकी, क्योंकि प्रशासनिक व्यस्तता के कारण समय नहीं मिल पाया। राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। इस पर अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 22 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की, जबकि हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसे दलबदल बताते हुए उमंग सिंघार ने उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग विधानसभा अध्यक्ष से की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

2023 में कांग्रेस टिकट पर जीती थीं चुनाव

2023 में बीना सीट से निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ बीजेपी के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने के दावे किए गए थे।

5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिका लगाई। इसमें कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी बदलने पर विधायक की सदस्यता खुद-ब-खुद समाप्त हो जाती है। जब इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो सिंघार ने नवंबर 2024 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने मांगे ठोस सबूत, सोशल मीडिया पोस्ट को नहीं माना आधार

इससे पहले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की थी, तब निर्मला सप्रे के वकील संजय अग्रवाल ने उनके कांग्रेस में ही होने का दावा किया था। कहा कि ऐसे में निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा था कि 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप की प्रतियां पेश कर देंगे। निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने के सबूत सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ भी उनकी कई तस्वीरें और पोस्ट वायरल हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति की स्थिति तय नहीं हो सकती है। याचिकाकर्ता, स्पीकर के समक्ष ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करें, जिससे यह साबित हो सके कि निर्मला सप्रे ने वास्तव में दल-बदल किया है।