मौत के 9 साल बाद जिंदा बताकर बेच दी जमीन
पथरिया ब्लॉक के
पिपरौधा छक्का में 9 साल पहले सड़क हादसे में मारे जा
चुके एक रिटायर्ड फौजी को जिंदा बताकर उनकी चार एकड़ जमीन दूसरे व्यक्ति को बेच दी
गई। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब जमीन की रजिस्ट्री दूसरे के नाम कराई गई और
नामांतरण भी कराया गया। हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्री कार्यालय ने फौजी की जगह
खड़े हुए दूसरे व्यक्ति को भी फौजी मान लिया और जमीन की रजिस्ट्री कर दी। अब इस
मामले की शिकायत भोपाल, सागर ओर कलेक्टर के पास की गई है। पिछले छह माह से
मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एग्रीमेंट कराया था, पर जमीन नहीं दीः पुरैना गांव निवासी अनु अनुज पांडे ने 26 मार्च 2021 रत्नेश, प्रभादेवी, नितिन राजपूत से से उनकी चार एकड़ में से डेढ़ जमीन
का एग्रीमेंट किया था। 9 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। जिसमें से चार लाख 50
हजार रुपए की राशि अनुज पांडे ने रत्नेश जमीन रत्नेश के पिता स्वर्गीय देवी सिंह
राजपूत के और उनकी मां प्रभा देवी को दी थी। चूंकि नाम से थी। रत्नेश ने आश्वासन
दिया था कि जमीन पहले वह पिता के नाम से अपने नाम पर ट्रांसफर कराएगा और उसके बाद
अनुज पांडे को रजिस्ट्री करेगा। इसके लिए उसे पौथी उठवाना थी।
मगर बाद में अनुज को पता चला कि जो जमीन रत्नेश ने उसे देने का एग्रीमेंट किया था। वह जमीन 10 दिसंबर 2021 दूसरे व्यक्ति शिवम राय को बेच दी गई। जब अनुज ने इसके दस्तावेज निकलवाए तो पता चला कि जमीन स्वर्गीय देवी सिंह राजपूत के साथ से थी, लेकिन वह ट्रांसफर रत्नेश के नाम से नहीं हुई। देवी सिंह राजपूत के हो पर नाम से सीधे शिवम राय को बेच दी गई। जबकि देवी सिंह राजपूत 23 सितंबर 2012 को निधन गया था। लेकिन इसके बाद भी उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति पेश करके रजिस्ट्री शिवम राय के नाम करा दी गई। जबकि सेना से रिटायर्ड देवी सिंह राजपूत की सड़क एक्सीडेंट में सागर के सनौधा के पास मौत हो गई थी। उनकी मौत के के 9 साल बाद में उन्हें जिंदा बताकर उनके नाम की जमीन बेच दी गई।
इतना ही नहीं, जमीन का नामांतरण भी पथरिया तहसीलदार, आरआई और पटवारी ने
मिलकर करा दिया। इतने बड़े स्तर के फर्जीवाड़ा में रजिस्ट्री कार्यालय के
अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। जिस व्यक्ति की मौत हो चुकी है। उसकी जगह पर
दूसरे व्यक्ति को खड़ा करके जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। एक तरह से यह मामला फर्जीवाड़ा
का है। पांडे ने बताया कि जब उन्हें एग्रीमेंट के हिसाब से जमीन नहीं मिली तो
उन्होंने कलेक्ट्रेट में लोकसेवा में आवेदन करके जानकारी निकाली। पता चला कि
रत्नेश और उसके परिवार ने पूरी चार एकड़ जमीन बेच दी है।
मामले कुछ भोपाल तक
शिकायत, जांच भी नहीं बैठाई: इस मामले को लेकर भोपाल, सागर, दमोह और एसपी कार्यालय में दर्ज कराई। मगर उसके बाद कोई जांच नहीं हुई है।
पांडे का कहना है कि इतने गंभीर में पुलिस की ओर से कोई एफआईआर नहीं हो रही है।
उसमें नहीं होगा। पांडे ने बताया कि उनकी राशि रत्नेश राजपूत वापस नहीं कर रहे हैं।
हे हैं और न ही जमीन दे रहे हैं। जबकि पूरे मामले में पटवारी राकेश विश्वकर्मा, तहसीलदार आलोक जैन, रजिस्ट्रार उल्लास नखारे की भूमिका संदिग्ध है, जो व्यक्ति फौत हो चुका है, इन अफसरों ने उसे जीवित बताकर उनके नाम की जमीन दूसरे
के नाम दर्ज करा दी।

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