दाऊ ने जो कला सिखाई, उसी से दी अंतिम विदाई:अखाड़ा गुरु पद्मश्री भगवानदास रायकवार पंचतत्व में विलीन
बुंदेलखंड की गौरवशाली परंपरा और प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्मश्री (2026) के लिए चयनित अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ का रविवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम यात्रा में दाऊ के शिष्यों और उनके बेटे राजकुमार रायकवार ने अखाड़े और लाठी कला का प्रदर्शन कर अपने गुरु को अंतिम विदाई दी। प्रशासन की ओर से एसडीएम अमन मिश्रा, तहसीलदार संदीप तिवारी ने मुक्तिधाम पहुंचकर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और तिरंगा झंडा अर्पित किया। वहीं पुलिस विभाग के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र अभिनेता राजकुमार, भतीजे राहुल और नाती विराट रायकवार ने दी।
अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधि व अफसर हुए शामिल
पद्मश्री भगवानदास रायकवार के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, यहां प्रशासन की ओर से कलेक्टर प्रतिभा पाल ने श्रद्धांजलि देते हुए शोक व्यक्त किया। अंतिम यात्रा में विधायक प्रदीप लारिया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, नगर निगम कमिश्नर राजकुमार खत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उनके शिष्य और शहरवासी शामिल हुए। पद्मश्री भगवानदास रायकवार का इलाज के दौरान शनिवार रात भोपाल एम्स में निधन हो गया था।
वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे थे। 83 वर्षीय भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र युद्ध कला ‘अखाड़ा’ और बुंदेली मार्शल आर्ट के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों से इस प्राचीन कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। इसी के चलते उन्हें वर्ष 2026 के लिए ‘पद्मश्री सम्मान’ के लिए चयनित किया गया।

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