‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर सियासी रणनीति का आरोप ?



 सितंबर 2023… संसद के इतिहास में एक बड़ा दिन महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 भारी बहुमत के साथ पारित हुआ 20 सितंबर 2023: लोकसभा में 454 वोट पक्ष में, सिर्फ 2 विरोध में 21 सितंबर 2023: राज्यसभा में मौजूद सभी 215 सांसदों ने समर्थन किया 28 सितंबर 2023: राष्ट्रपति की मंजूरी और यह बना 128वां संविधान संशोधन इतनी व्यापक सहमति के बाद उम्मीद जगी कि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब तेजी से बढ़ेगी लेकिन ढाई साल बाद भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है फिर क्यों आया नया संशोधन 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल पेश किया गया सरकार का कहना है कि यह बिल महिला आरक्षण को लागू करने और परिसीमन (सीटों के पुनर्गठन) से जुड़ा है यहीं से सवाल उठने लगे अगर कानून पहले ही पास हो चुका था, तो अब नए संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?सियासी मंशा पर तेज बहस राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं एक पक्ष का मानना है कि यह महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है वहीं, दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की रणनीति मान रहा है आरोप-प्रत्यारोप भी तेज सत्तापक्ष पर आरोप खुद को “नारी शक्ति का सबसे बड़ा हितैषी” साबित करने की कोशिश विपक्ष पर निशाना—उसे “महिला विरोधी” दिखाने की रणनीति असल अड़चन कहां है (सरल समझें) महिला आरक्षण कानून लागू होने की शर्तें ही इसकी देरी की बड़ी वजह हैं यह आरक्षण अगली जनगणना के बाद लागू होगा उसके बाद परिसीमन (Delimitation) होगा—यानी सीटों की नई सीमा तय होगी फिर ही संसद और विधानसभाओं में सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी यानी कानून पास हुआ, लेकिन उसका लागू होना एक प्रक्रिया पर निर्भर है, जो अभी पूरी नहीं हुई अब बड़े सवाल_ जब सभी दल इस कानून के समर्थन में थे, तो लागू करने में देरी क्यों क्या महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा अगर हां, तो इसकी समय सीमा क्या है क्या यह कानून अगले चुनाव तक लागू हो पाएगा क्या महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा,या यह मुद्दा सिर्फ चुनावी बहसों तक सीमित रहेगा ।

संवाददाता:- स्वाति रजक