पहला कौर खाते ही कलेक्टर को लग गई मिर्ची, भोजन में सब्जी नहीं केवल दाल मिली

दमोह में जहां एक ओर कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह का निरीक्षणों का दौर जारी है वहीं सरकारी भोजन की गुणवत्ता खराब मिलने का सिलसिला भी लगातार चल रहा है। कलेक्टर ने सुबह संयुक्त कार्यालय कलेक्ट्रेट का निरीक्षण किया था। वे फिर निकल पड़े और शहर के फिल्टर प्लांट तथा अजा छात्रावास का निरीक्षण किया। छात्रावास में उन्होंने स्टूडेंट के लिए बनाया भोजन चखा। दाल का स्वाद चखते ही कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह को मिर्ची लग गई। तब उन्होंने मिर्च कम डालने की हिदायत दी।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार को संयुक्त कार्यालय कलेक्ट्रेट का निरीक्षण किया। वे सुबह 10 बजे ही निरीक्षण के लिए पहुंच गए। इस दौरान कार्यालय परिसर में स्वच्छता एवं भवन की मरम्मत संबंधी कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए।

निरीक्षण के समय अनुपस्थित पाए गए अधिकारी, कर्मचारियों को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कार्यालय में समय पर उपस्थित होकर पदीय कार्य संपादित करने के लिए निर्देशित किया। वहीं, उन्हें सचेत किया कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही कदापि स्वीकार्य नहीं होगी व कठोर कार्रवाई की जाएगी।

शुक्रवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने शहर के फिल्टर प्लांट और अजा छात्रावास का निरीक्षण किया। कमियां मिलने पर संबंधितों को फटकार लगाई। छात्रावास में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बच्चों के लिए बना खाना चखा। भोजन में सब्जी नहीं थी केवल दाल बनी थी। दाल मुंह में लेते ही कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को मिर्ची लगी तो वे बोले— बच्चियां इतनी मिर्ची कैसे खाती होंगी! उन्होंने कम मिर्च डालने की हिदायत भी दी।

खाने में चींटी, रोटियां मिली कच्ची, सब्जी नाममात्र की

बता दें कि गुरुवार को ही पटेरा में सरकारी कर्मचारियों के भोजन में चींटी निकली थी और कच्ची रोटियां व नाममात्र की
सब्जी दी गई थी। तहसील के शासकीय सांदीपनि हायर सेकेंडरी स्कूल पटेरा में चल रहे जनगणना प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षकों ने खराब गुणवत्ता के भोजन मिलने के आरोप लगाए। गुरुवार को प्रशिक्षकों ने आए भोजन को छोड़कर भूखे रहकर ही प्रशिक्षण प्राप्त किया। भोजन की व्यवस्था तहसीलदार कार्यालय से होनी थी।

प्रशिक्षक देवेंद्र राजपूत ने शिकायत करते हुए बताया कि उन्हें दिए जा रहे भोजन में गुणवत्ता नहीं है। आरोप है कि रोटियां कच्ची थीं, दाल भी कच्ची थी, सब्जी में भिंडी के मात्र चार टुकड़े थे और मीठे में चींटियां मिली थीं। उन्होंने नायब तहसीलदार से शिकायत की और बताया कि शासन ने प्रति प्रशिक्षक 200 रुपए की दर से खाना एवं दो टाइम की चाय निर्धारित की है, जबकि उन्हें पूरे दिन भूखा रहना पड़ा।

पटेरा के प्रभारी तहसीलदार उमेश तिवारी ने इस संबंध में बताया कि एक दिन पूर्व कुंडलपुर कैंटीन से खाना मंगाया गया था, लेकिन कैंटीन वाले के यहां शादी के कारण पटेरा से भोजन बुलवाया गया। उन्होंने कहा कि रोटियां गर्म थीं, पैकिंग से भाप के कारण उनमें नमी आ गई थी। मिठाई में चींटियां मिलने पर उसे बदलवाकर दूसरी मंगवा दी गई थी। तिवारी ने स्पष्ट किया कि 200 रुपए पूरे प्रशिक्षण के लिए निर्धारित हैं, जो प्रतिदिन के हिसाब से 50 रुपए भी नहीं होते।

इधर प्रभारी जनगणना प्रशिक्षण दमोह की संयोजक अलका दास ने बताया कि प्रशिक्षकों के भोजन और चाय की व्यवस्था तहसील या नगरपालिका की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिदिन के हिसाब से 200 रुपए प्रति प्रशिक्षक की राशि प्रदान की जानी है।